चित्त-शुद्धि: अंतर्मन की स्वच्छता से परमात्मा तक का मार्ग – Self-Purification in Indian Spirituality
अध्यात्म का वास्तविक अर्थ बाहरी कर्मकांडों या वेशभूषा में नहीं, बल्कि मन की आंतरिक निर्मलता में निहित है। भारतीय अध्यात्म के तीन प्रखर पुंजों— श्रीतैलंग स्वामीजी, श्रीउड़िया बाबा और स्वामी अखण्डानन्द सरस्वती के दिव्य अनुभवों पर आधारित यह लेख ‘चित्त-शुद्धि’ या Self-Purification in Indian Spirituality के गूढ़ रहस्य को उजागर करता है। जहाँ तैलंग स्वामीजी … Read more